धोखे के बाद रिश्ते में दोबारा भरोसा कैसे बनाएं: 10 आसान तरीके
Reviewed by
Dr. Ritu Bansal · MA (Psychology), M.Phil (Clinical Psychology)
मैं जानती हूँ कि आप अभी आईने के सामने खड़ी होकर खुद को देख रही होंगी और सोच रही होंगी, 'हम यहाँ तक कैसे पहुँच गए?' आपके सीने में एक भारीपन है, गुस्सा है, उदासी है और वो डर कि क्या अब सब कभी 'नॉर्मल' हो पाएगा। प्लीज, एक गहरी सांस लें। कोशिश करने का फैसला लेना कमजोरी नहीं है, और आप बिल्कुल अकेली नहीं हैं। धोखे से उबरना एक लंबा और मुश्किल रास्ता है, लेकिन शांति वापस पाना मुमकिन है—चाहे वो उनके साथ हो या फिर खुद के अंदर।
What You'll Need
- धैर्य (बहुत सारा)
- ईमानदार और असहज बातचीत
- मेंटल पीस के लिए बाउंड्रीज
- रोने के लिए एक सुरक्षित जगह
- एक दिन में एक कदम आगे बढ़ने की इच्छा
पूरी ईमानदारी की मांग करें
भरोसे की नींव के लिए झूठ का पूरी तरह खत्म होना जरूरी है। अगर आप साथ रहना चाहती हैं, तो उन्हें आपके सवालों का सच-सच जवाब देना होगा, चाहे वो कितना भी दर्दनाक क्यों न हो। आप उसे ठीक नहीं कर सकतीं जिसे आप स्वीकार नहीं करतीं।
Keep in mind: उन्हें आपको 'पागल' साबित करने न दें, सिर्फ इसलिए क्योंकि आप सवाल पूछ रही हैं।
साफ और नॉन-नेगोशिएबल बाउंड्रीज तय करें
आपको दोबारा सुरक्षित महसूस करने की जरूरत है। इसका मतलब उनके फोन का एक्सेस होना, वो कहां हैं ये पता होना, या उस इंसान से कांटेक्ट खत्म करना हो सकता है। ये 'कंट्रोलिंग' नहीं है; ये बस कुछ समय के लिए वो सुरक्षा घेरा है जो आपके दिल को हील होने में मदद करेगा।
Worth knowing: ये नियम साथ मिलकर बनाएं ताकि ये जेल की सजा नहीं, बल्कि टीम एफर्ट लगे।
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अपने 'मी टाइम' पर फोकस करें
चोट लगने पर हम अक्सर 'हम' में खुद को खो देते हैं। अपने दोस्तों के साथ समय बिताएं, कोई हॉबी शुरू करें या बस वॉक पर जाएं। जब आप अपनी खुशी खुद बनाना सीख जाती हैं, तो आप अपनी वर्थ के लिए उनके एक्शन पर डिपेंड नहीं रहतीं।
प्रोफेशनल मदद लें
कभी-कभी दर्द इतना बड़ा होता है कि अकेले नहीं सहा जाता। एक रिलेशनशिप काउंसलर एक पुल की तरह काम कर सकता है, जो आप दोनों को बिना चिल्लाए बात करने में मदद करेगा। यह एक न्यूट्रल जगह है जहां आपकी बात सुनी जाएगी।
सुनिश्चित करें कि थेरेपिस्ट नॉन-जजमेंटल हो और आपकी भलाई का सपोर्ट करे, न कि सिर्फ 'शादी बचाने' पर जोर दे।
माफी एक प्रोसेस है, कोई स्विच नहीं
सिर्फ 'शांति बनाए रखने' के लिए उन्हें माफ करने का दबाव खुद पर न डालें। माफी वो चीज है जो आप अपने लिए करती हैं जब आप तैयार होती हैं, न कि इसलिए क्योंकि उन्होंने सॉरी कह दिया। उन दिनों में गुस्सा महसूस करना बिल्कुल नॉर्मल है जब आपको सब कुछ याद आता है।
"भरोसा एक आईने की तरह होता है; एक बार टूट जाए तो उसे जोड़ा तो जा सकता है, लेकिन दरारें हमेशा दिखेंगी—और ये ठीक है, ये आपकी कहानी का हिस्सा हैं।"
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क्या मैं कभी उन पर दोबारा पूरी तरह भरोसा कर पाऊंगी?
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Dr. Ritu Bansal
MA (Psychology), M.Phil (Clinical Psychology)
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